By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Hindustan ExpressHindustan Express
  • Home
  • देश
  • विदेश
  • राज्य
  • मध्यप्रदेश
    • मध्यप्रदेश जनसंपर्क
  • छत्तीसगढ़
    • छत्तीसगढ़ जनसंपर्क
  • राजनीती
  • धर्म
  • अन्य खबरें
    • मनोरंजन
    • खेल
    • तकनीकी
    • व्यापार
    • करियर
    • लाइफ स्टाइल
Search
  • Advertise
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
Reading: नक्सलवाद से घिरे क्षेत्र में अहिंसा की मिसाल, 73 वर्षों का संघर्ष और सफलता की कहानी
Share
Sign In
Notification Show More
Font ResizerAa
Hindustan ExpressHindustan Express
Font ResizerAa
  • Home
  • देश
  • विदेश
  • राज्य
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • राजनीती
  • धर्म
  • अन्य खबरें
Search
  • Home
  • देश
  • विदेश
  • राज्य
  • मध्यप्रदेश
    • मध्यप्रदेश जनसंपर्क
  • छत्तीसगढ़
    • छत्तीसगढ़ जनसंपर्क
  • राजनीती
  • धर्म
  • अन्य खबरें
    • मनोरंजन
    • खेल
    • तकनीकी
    • व्यापार
    • करियर
    • लाइफ स्टाइल
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Advertise
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
Hindustan Express > Blog > राज्य > छत्तीसगढ़ > नक्सलवाद से घिरे क्षेत्र में अहिंसा की मिसाल, 73 वर्षों का संघर्ष और सफलता की कहानी
छत्तीसगढ़राज्य

नक्सलवाद से घिरे क्षेत्र में अहिंसा की मिसाल, 73 वर्षों का संघर्ष और सफलता की कहानी

News Desk
Last updated: 2025/05/24 at 8:25 PM
News Desk
Share
5 Min Read
नक्सलवाद से घिरे क्षेत्र में अहिंसा की मिसाल, 73 वर्षों का संघर्ष और सफलता की कहानी
SHARE

रायपुर

तिहत्तर साल बीत गए, पांच पीढ़ियां खप गईं, तब जाकर छत्तीसगढ़ में नगरी-सिहावा के आंदोलन का एक चक्र पूरा हुआ। दुष्यंत कुमार की पंक्तियां याद आती हैं – “पिछले सफर की न पूछो, टूटा हुआ एक रथ है, जो रुक गया था कहीं पर फिर साथ चलने लगा है।”

नक्सलवाद के लाल गलियारे के बीच नगरी-सिहावा अहिंसा का एक टापू है। 1952 से अब तक यहां के आदिवासियों ने पीढ़ी दर पीढ़ी अपने भूमि अधिकारों के लिए निरंतर अहिंसक संघर्ष किया। जब नया छत्तीसगढ़ राज्य बन रहा था, तब लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहकर हजारों आदिवासी ने राजधानी रायपुर में डेरा डाले थे और देश की आज़ादी के बाद से चल रहे इस आंदोलन को गति दे रहे थे।

डॉ. राममनोहर लोहिया सन् 1952 में छत्तीसगढ़ अंचल में धमतरी जिले के उमरादेहान गांव में आए थे। यहीं से उन्होंने जंगलों में बसे आदिवासियों के भूमि-अधिकार का मुद्दा उठाया था। आज भारत में आदिवासियों को आजीविका के लिए ज़मीन मिली है, वनग्रामों को राजस्व ग्राम जैसी सुविधाएं मिल रही हैं। इन सबके मूल में नगरी-सिहावा का ही आंदोलन है। इसी उमरादेहान गांव में आगामी 24 मई को डॉ. राममनोहर लोहिया की अर्ध-प्रतिमा का अनावरण होने जा रहा है। आदिवासियों ने एक-एक मुठ्ठी अनाज हर घर से लेकर प्रतिमा तैयार कराई है।

लोहिया जी जब तक रहे, यानी 1967 तक, इस आंदोलन का नेतृत्व किया। 1977 के बाद इसकी बागडोर देश के सुप्रसिद्ध समाजवादी नेता रघु ठाकुर ने संभाली। उनका समूचा जीवन संघर्ष और आंदोलनों में बीता। आपातकाल में उन्नीस महीने जेल में रहे।

अनेक संघर्षों के बाद सन् 1990 आते-आते नगरी-सिहावा के अठारह में से तेरह गांवों के आदिवासियों को ज़मीन का पट्टा मिल गया, पर पांच गांव फिर भी छूट गए। इससे पांच साल पहले प्रधानमंत्री राजीव गांधी यहां दुगली में आए थे, आदिवासियों की झोपड़ी के सामने चारपाई पर बैठे थे, पर आदिवासियों को उनके हक बिना पदयात्रा, प्रदर्शन व अनशन के नहीं मिले। रघु ठाकुर ने जाकर आदिवासियों के इस आंदोलन को तेज किया। उसी दुगली से रायपुर तक 120 किमी की पदयात्रा की जिसमें हजारों आदिवासी – आदमी, औरतें और बच्चे पैदल चले थे।

इन आंदोलनों में पत्रकार मधुकर खेर, गोविंदलाल वोरा, सत्यनारायण शर्मा, नारवानी जी व रमेश वल्यानी का बड़ा सहयोग मिला। सरकार के मंत्रियों ने आकर आश्वासन देकर आंदोलन स्थगित कराया, पर वादा पूरा नहीं किया। रघु जी को फिर रायपुर आकर अंबेडकर चौक पर अनशन शुरू करना पड़ा। सांसद जॉर्ज फर्नांडीस और शरद यादव ने आकर गिरफ्तारियां दीं, मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा ने हस्तक्षेप किया, तब जाकर दोनों पक्ष में समझौते के कागज़ तैयार हुए। इसके तहत तय हुआ कि अठारह गांवों के कब्जे की ज़मीन की जांच कराई जाएगी और निर्धारित नियम के तहत पट्टे दिए जाएंगे। जिन पांच गांवों को उजाड़ा गया है, उन गांवों के लोगों की भी झोपड़ियों को दुरुस्त कराकर बसाया जाएगा, ज़मीन दी जाएगी। तेरह गांवों को तो पट्टा मिल गया, लेकिन यही पांच गांव को पट्टा मिलने में पच्चीस साल और लग गए।

देश की जनता के सामने जब भी इस आंदोलन का इतिहास आएगा, सुखराम नागे, जुगलाल नागे, बिसाहूलाल साहू, रामू, बिसाहिन बाई, समरीनबाई, रामप्रसाद नेताम, गौड़ा राय, वंशी श्रीमाली, जालिम सिंह जैसे अनेक लोगों का संघर्ष सभी को प्रेरणा देगा।

इस आंदोलन के संदर्भ में यह बताना भी जरूरी है कि कुछ लोग सत्ता में रहते हुए भी समय पर कुछ नहीं कर पाए, कुछ ने समय का लाभ उठाकर अपने वैचारिक समर्थकों को उपकृत किया, तो कुछ आदिवासियों को समाजवादी धारा से हटाकर अपनी-अपनी राजनीतिक ज़मीन पुख्ता करने का प्रयास किया।

नगरी-सिहावा का तिहत्तर साल चला आंदोलन अभी थमा नहीं है। यह चिकित्सा और शिक्षा के मूल अधिकार की लड़ाई को आगे ले जाएगा। इस आंदोलन का कई कारणों से ऐतिहासिक महत्व है। नक्सली हिंसा से घिरे वनांचल में यह अहिंसा का टापू है। भारत का पहला वनग्राम सम्मेलन यहीं से शुरू हुआ। और, वन अधिकार कानून का जन्मदाता यही क्षेत्र है। यहां की महिलाओं की मुक्त भावना और संघर्ष के जज़्बे से शेष भारत प्रेरणा ले सकता है।

You Might Also Like

प्रस्तावित राज्यपाल दौरे से पहले प्रशासन सतर्क, कलेक्टर जयति सिंह ने नागलवाड़ी में किया निरीक्षण

जनदर्शन में उमड़ी भीड़, कलेक्टर ने एक-एक कर सुनी समस्याएं

कलेक्टर ने कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के वार्षिक कैलेंडर का किया विमोचन

छत्तीसगढ़ में ठंड से बनी रहेगी राहत, लगातार तीसरे दिन सबसे अधिक तापमान दर्ज

CM मोहन यादव का बयान: Union Budget दूरदर्शी, रेलवे में क्रांति की उम्मीद

News Desk May 24, 2025 May 24, 2025
Share This Article
Facebook Twitter Copy Link Print
Previous Article मध्यप्रदेश को अग्रणी राज्य बनाने के लिए सरकार संकल्पित: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश को अग्रणी राज्य बनाने के लिए सरकार संकल्पित: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
Next Article कोर नक्सल क्षेत्र में खुली एक्सिस बैंक की शाखा कोर नक्सल क्षेत्र में खुली एक्सिस बैंक की शाखा
- Advertisement -
Ad imageAd image
- Advertisement -
Ad imageAd image

Stay Connected

235.3k Followers Like
69.1k Followers Follow
11.6k Followers Pin
56.4k Followers Follow
136k Subscribers Subscribe
4.4k Followers Follow

ताजा ख़बरें

प्रस्तावित राज्यपाल दौरे से पहले प्रशासन सतर्क, कलेक्टर जयति सिंह ने नागलवाड़ी में किया निरीक्षण
प्रस्तावित राज्यपाल दौरे से पहले प्रशासन सतर्क, कलेक्टर जयति सिंह ने नागलवाड़ी में किया निरीक्षण
मध्यप्रदेश राज्य
जनदर्शन में उमड़ी भीड़, कलेक्टर ने एक-एक कर सुनी समस्याएं
जनदर्शन में उमड़ी भीड़, कलेक्टर ने एक-एक कर सुनी समस्याएं
छत्तीसगढ़ राज्य
कलेक्टर ने कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के वार्षिक कैलेंडर का किया विमोचन
कलेक्टर ने कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के वार्षिक कैलेंडर का किया विमोचन
छत्तीसगढ़ राज्य
छत्तीसगढ़ में ठंड से बनी रहेगी राहत, लगातार तीसरे दिन सबसे अधिक तापमान दर्ज
छत्तीसगढ़ में ठंड से बनी रहेगी राहत, लगातार तीसरे दिन सबसे अधिक तापमान दर्ज
छत्तीसगढ़ राज्य
//

यह एक हिंदी वेब न्यूज़ पोर्टल है जिसमें ब्रेकिंग न्यूज़ के अलावा राजनीति, प्रशासन, ट्रेंडिंग न्यूज, बॉलीवुड, खेल जगत, लाइफस्टाइल, बिजनेस, सेहत, ब्यूटी, रोजगार तथा टेक्नोलॉजी से संबंधित खबरें पोस्ट की जाती है।

Disclaimer - समाचार से सम्बंधित किसी भी तरह के विवाद के लिए साइट के कुछ तत्वों में उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत सामग्री ( समाचार / फोटो / विडियो आदि ) शामिल होगी स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक इस तरह के सामग्रियों के लिए कोई ज़िम्मेदार नहीं स्वीकार करता है। न्यूज़ पोर्टल में प्रकाशित ऐसी सामग्री के लिए संवाददाता / खबर देने वाला स्वयं जिम्मेदार होगा, स्वामी, प्रकाशक, संपादक की कोई भी जिम्मेदारी नहीं होगी. सभी प्रकार के विवादों का न्याय क्षेत्र- धौलपुर, जिला- धौलपुर (राजस्थान) होगा।
संपादक - Gaurav Shukla
मोबाइल - 9166652528
ईमेल - contact@hindustanexpress.live

प्रबंध संपादक - Mukesh Rana
मोबाइल - 7239927927

कार्यालय - Dholpur, Rajasthan - 328001
Follow US
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
  • Home
  • About Us
  • Contact Us
  • MP Info RSS Feed
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?